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-LIVE -( 108 ) DAY 3 --श्रीमद्भागवत कथा । श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज 06.06.2026 . वृन्दावन

-LIVE -( 108 ) DAY 3 --श्रीमद्भागवत कथा । श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज 06.06.2026 . वृन्दावन

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البم سے Aniruddhacharya ji

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-LIVE -( 108 ) DAY- 3 --श्रीमद्भागवत कथा । श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज 06.06.2026 . वृन्दावन- U.P #shrianiruddhacharyajimaharaj #aniruddhacharyajilive #vrindavan #bhajan एक ही संकल्प, एक ही नारा । सेवा ही है, धर्म हमारा।। - श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज सनातन धर्म की ध्वजा को लेकर पूरे विश्व में लाखों-करोड़ों लोगों को गौरी गोपाल भगवान की भक्ति और अपनी अमृतमयी वाणी से सेवा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़कर लोगों का जीवन बदलने वाले श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के आधिकारिक यूट्यूब चैनल में आपका स्वागत है। आपको जानकार खुशी होगी कि यह यूट्यूब चैनल पूरे विश्व में अध्यात्म का सबसे बड़ा यूट्यूब चैनल है जहाँ ठाकुर जी नित्य दिव्य लीलाओं का श्रवणपान कथाओं के माध्यम से कराया जाता है। आइए हम भी इस परिवार का हिस्सा बनकर सनातन धर्म को और उच्च शिखर तक पहुंचाने में पूज्य महाराज जी की मदद करें- पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज और गौरी गोपाल आश्रम के तत्वावधान में निरंतर चलने वाली सेवाएं जिनसे जुड़कर आप अपने धन को धर्ममय बनाकर पुन्य की प्राप्ति अवश्य करें- वृद्ध आश्रम पूज्य महाराज जी के पावन सानिध्य में श्री धाम वृंदावन की पावन पवित्र भूमि पर एक ऐसे आश्रम की नींव रखी गई जहां संपूर्ण मातृशक्ति को सम्मान तो मिलेगा ही साथ ही वहां अपनों का प्यार भी पूज्य महाराज श्री जी से मिलेगा और उस आश्रम का नाम रखा गया गौरी गोपाल वृद्धाश्रम .. बदलते समाज की अवधारणा ने एक ऐसा भीषण रूप ले लिया है जहां अपने सगे पुत्र ही अपने माता पिता को दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर देते हैं और उन्हें हाथ पकड़ कर घर से बाहर धकेल देते हैं जब यह पीड़ा पूज्य महाराज श्री तक पहुंची तब उन्होंने ऐसा संकल्प लिया कि हम ऐसे अपनों के द्वारा ठुकराए हुए सताए हुए वृद्धजनों की सेवा करेंगे और एक संकल्प के साथ में आश्रम की नींव रखी गई जहां लगभग 262 से कहीं ज्यादा वृद्ध मां अभी भी रह रहीं हैं। पूज्य महाराज श्री जी का सपना है कि हम 1000 से कहीं ज्यादा वृद्धमाताओं को आश्रय देते हुए आदर भाव, सम्मान सहित सभी माताओं की सेवा करें। गौरी गोपाल अन्नक्षेत्र सेवा अन्न दानं समं दानं, ना भूतो ना भविष्यति। देवर्षि-पित्र-भूतानां, तृप्तिरन्नेन जायते ।। (गर्ग सहिंता) अन्य क्षेत्र के समान दान ना तो पूर्व में हुआ है ना अब है ना आगे भविष्य में होगा क्यो

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