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Do Kash Zindagi

البم

Do Kash Zindagi

साहित्य में हमें मदिरा के ऊपर तो बहुत कुछ लिखा हुआ नज़र आता है, परंतु धूम्रपान के ऊपर कोई विशेष कार्य नहीं हुआ है। विश्व में करीब 100 करोड़ लोग सिगरेट फूँकते हैं और करीब 10 अरब सिगरेट रोज़ बिकती हैं। इतने व्यापक अस्तित्व के कारण धूम्रपान, सिर्फ करने वालों तक सिमित नहीं है। धुआँ तो वैसे भी किसी में कोई फ़र्क नहीं करता। इसलिए, ‘दो कश ज़िंदगी’, एक ऐसी कविता है जो सबसे जुड़ी है, जिसका मुख्य किरदार एक धूम्रपान करने वाला है और कविता उसके जीवन को कई दृष्टिकोण से बखान करती है।राजा', मध्यप्रदेश के जंगलों से आते हैं और स्वच्छ हवा में साँस लेना पसंद करते हैं, परंतु हॉस्टल में उनके कमरे पर कोई न कोई सिगरेट फूँकते ही मिलता था। आज जब उस धुएँ ने शब्दों की शक्ल ले ली है तो उसका बहुत बड़ा श्रेय कवी के मित्रों को जाता है। यूँ तो राजा पिछले तकरीबन 20 सालों से कविता लिख रहे हैं, परंतु 'दो कश ज़िंदगी' उनकी पहली प्रकाशित कविता है। इसके अलावा, उनके तीन उपन्यास, 'ज़िंदगी शायराना', 'शेर' और 'अ रोअरिंग क्राई' भी प्रकाशित हो चुके हैं। नागपुर में जन्मे 'राजा', आजकल हैदराबाद में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत हैं।Please note: This audiobook is in Hindi.Read more

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