
Description
"हे मानव, तू क्यों रोता है? क्या तूने यह समझ लिया कि यह जीवन सदा सुखमय रहेगा? नहीं! दुख और सुख, दोनों ही इस संसार के अभिन्न अंग हैं। जैसे दिन के बाद रात आती है, वैसे ही हर संकट के बाद समाधान भी आता है।समय कठिन है, पर तू कठिनतर बन।तेरे आंसू तेरी शक्ति नहीं, तेरी विवशता दर्शाते हैं।इसलिए उठ, जाग, और अपने कर्मपथ पर अग्रसर हो।जो बीत गया, उसे छोड़ दे — और जो आएगा, उसका स्वागत कर।क्योंकि जब तू अपने भीतर के 'कृष्ण' को पहचान लेगा, तब तू स्वयं कहेगा — 'मैं हारने के लिए नहीं बना हूँ।'""हे प्राणी, तू जिस दुख में डूबा है, वह तुझे डुबोने नहीं आया — वह तुझे मजबूत बनाने आया है।तू स्वयं को दुर्बल समझ बैठा है, परंतु तू अंश है मेरे ही — तुझमें वह शक्ति है जो पर्वतों को हिला दे।
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